ब्रिटेन का मौजूदा जॉब मार्केट और भारत के छात्रों का हो टीशर्ट पलायन:
अगर आप भी ब्रिटेन से पढ़ाई कर रहे है तो आपने इस विषय के बारे में जरूर सुन रखा होगा, क्योंकि बाहर पढ़ने वाले छात्रों के बीच यह विषय बहुत पॉपुलर बना हुआ है और खासकर ऐसे छात्र जो ब्रिटेन में ही अपना कैरियर बनाना चाहते हैं।
ब्रिटेन में पढ़ने गए भारतीय स्टूडेंट की एक शिकायत आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने बताया है कि यहां जॉब मार्केट की स्थिति बहुत खराब हालत में है, और ग्रेजुएशन के बाद एक अच्छी नौकरी पाने के लिए बहुत धक्के खाने पड़ रहे हैं। अभी तक तो ब्रिटेन में पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे स्टूडेंट के लिए यहां कैरियर बनाना बहुत आसान लगता था, पहले डिग्री लो फिर ग्रेजुएट वीजा हासिल करो और नौकरी शुरू कर दो यह सब बहुत आसान लगता था। और तो और स्टूडेंट को नौकरी पाने में दिक्कतें भी बहुत कम होती थी।
हालांकि कोरोना की महामारी और ब्रेगिज़ट के बाद से ही यहां के जॉब मार्केट को लेकर सिर्फ नकारात्मक खबरें ही आ रही है। और सोशल मीडिया पर तो आपको कैसे बहुत सारे पोस्ट मिल जाएंगे जिसमें कहा जा रहा है कि ब्रिटेन में स्टूडेंट्स के लिए नौकरियां नहीं है।
ज्यादातर लोगों ने जॉब ना मिलने की सबसे बड़ी वजह AI और ऑटोमेशन को बताया है। जिसकी वजह से कंपनियों ने नई हायरिंग बंद कर दी है। इसे हजारों भारतीय छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
ब्रिटेन में ग्रेजुएशन के बाद जॉब कैसे मिलेगी?
जहां एक तरफ ब्रिटेन में नौकरियों की भारी कमी बताई जा रही है, वही हम आपको बताएंगे की नौकरियां को कमी के बीच आपको ब्रिटेन में जो कैसे मिलेगी। आइये आसान भाषा में समझते हैं।
ग्रेजुएट रूट वीजा — छात्रों को ग्रेजुएशन के बाद 2 साल तक काम करने के लिए ग्रेजुएट रूट वीजा लेना पड़ता है।
आवेदन प्रक्रिया— डिग्री पूरी होने के बाद ही छात्र तुरंत ही इस वीजा के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
स्किल्ड वर्कर वीजा— ग्रेजुएट रूट वीजा खत्म होने के बाद अगर किसी कंपनी का स्पॉन्सरशिप मिलता है, तो फिर स्किल्ड वर्कर वीजा भी ले सकते हैं।
अब तक कितने भारतीयों ने छोड़ा ब्रिटेन?
हाल ही में जारी हुई ऑफिस का नेशनल स्टैटिसटिक्स (ONS) की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय स्टूडेंट और वर्कर ब्रिटेन छोड़कर जा रहे विदेशी नागरिकों में सबसे बड़ा ग्रुप है।
ONS के डेटा के मुताबिक ब्रिटेन छोड़ने वाले विदेशी लोगों की संख्या 1.71 लाख है। जिसमें करीब सबसे ज्यादा 51000 भारतीय छात्र हैं। इसके अलावा 21000 ऐसे भारतीय वर्कर हैं जो काम के सिलसिले में दूसरे देशों में चले गए। 3000 ऐसे लोग थे जिन्होंने ब्रिटेन छोड़ने की कोई वजह भी नहीं बताई।
AI के दौर में नौकरी पाने के लिए जरूरी मानव स्किल्स:
अब यह सवाल आता है कि अगर कोई भारतीय छात्र ब्रिटेन में ग्रेजुएट होता है, तो उसे वहां पर नौकरी कैसे मिलेगी? खासकर ऐसे समय में जब AI का बोलबाला हर एक सेक्टर में दिख रहा है।
बर्मिंघम यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर और रिक्रूटमेंट और स्टूडेंट मोबिलिटी की प्रमुख डॉक्टर क्रिस्टीना सैमब्रुक ने नवभारत टाइम से बात करते हुए इन सवालों का जवाब दिया। उन्होंने यह भी बताया कि यूनिवर्सिटीज कैसे स्टूडेंट्स को AI के दौर में जॉब के लिए तैयार कर रहे हैं।
भारतीय स्टूडेंट्स ब्रिटेन में जॉब कैसे कर सकते हैं?
डॉक्टर क्रिस्टीना सैम्ब्रुक से सवाल किया गया इस AI के दौर में ब्रिटिश कंपनियों में जो पानी या सफल होने के लिए भारतीय ग्रेजुएट को क्या अलग करना चाहिए?
इसके जवाब में उन्होंने चार ऐसी चीजों की बात की है जो अगर किसी स्टूडेंट में है तो उसके लिए जॉब पाना बेहद आसान हो सकता है। डॉक्टर क्रिस्टीना सैम्ब्रुक ने बताया कि अभी लगातार मेहनत करने वाले स्टूडेंट्स की सफल हो सकते हैं।
डॉक्टर सैम्ब्रुक ने कहा कि स्टूडेंट्स अभी बेहतर इंसान बने क्योंकि अभी हर किसी को इसकी जरूरत है। ज्यादा सेहेनशील मिलनसार और कठिन कार्य करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। मैं इन्हें सॉफ्ट स्किल नहीं कहती हूं क्योंकि यह बिल्कुल भी सॉफ्ट नहीं है इनको खुद में विकसित करना बहुत कठिन काम है। ज्यादातर लोग तो इसे पूरी तरह सिख भी नहीं पाते। एक ऐसी दुनिया में जहां हर किसी के पास टेक्निकल स्किल है सिर्फ यह चीज आपको नौकरी नहीं दिलाएंगी।
उन्होंने जॉब पाने के लिए जरूरी स्किल की बात करते हुए कहा जो चीज आपको अलग बनाएगी वह आपका नजरिया, पहल करने की क्षमता, और चुनौतियों को स्वीकार करना, जब आसान रास्ता चुनना सरल हो तब भी मुश्किल चुनौती के लिए हां कहना और लगातार मेहनत करना यही वह चीज है जो आपको खास बनाती है। स्टूडेंट को अपनी cv में इन चीजों को शामिल करना चाहिए ताकि कंपनी प्रभावित हो सके।
AI के दौर में बिजनेस कैरियर का क्या होगा?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बिजनेस फील्ड को भी बहुत प्रभावित किया है। आप सिर्फ मैनेजमेंट या ग्रेजुएशन की डिग्री होने से ही कामयाबी का रास्ता नहीं खुलता। अब क्रिएटिविटी रणनीतिक सोच और नैतिकता से जुड़े फैसले पहले से ज्यादा जरूरी हो चुके हैं। AI के दौर में बिजनेस फील्ड में करियर को लेकर डॉक्टर क्रिस्टीना सैम्ब्रुक ने बात की है।
उनसे सवाल किया गया कि AI के दौर में बिजनेस सीट किस तरह बदल रहा है?
AI सब कुछ बदल देगा और हमें इसके लिए तैयार रहना जरूरी है हमें सीखने पर अपने और छात्रों को वास्तव में सोचने के लिए प्रेरित करने के नए तरीकों की जरूरत है। ना कि सिर्फ AI को एक शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल करने की। सबसे बड़ा खतरा यह बन गया है कि छात्र अब खुद सोचने के बजाय अपना हर काम AI से करवा रहे हैं। इसका नतीजा यह होता है कि आप डिग्री तो ले लेते हैं लेकिन असल शिक्षा नहीं मिल पाती है। AI की दुनिया में जो स्किल हमेशा काम आने वाली है वह नैतिक समाज अल समस्याओं का समाधान करना कब एक तकनीकी रूप से सही जवाब भी गलत हो सकता है। यह स्किल आप केवल खुद काम करके ही सीख सकते हैं। क्रिटिकल थिंकिंग पहले भी जरूरी थी लेकिन अभी अनिवार्य बन गई है।
स्टूडेंट का कैरियर बनाने के लिए यूनिवर्सिटी क्या कर रही?
डॉ. सैम्ब्रुक से सवाल किया गया की ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज विदेशी छात्रों के करियर को बेहतर बनाने के लिए क्या काम कर रही हैं। इसमें उनका क्या रोल है। क्या इंडस्ट्री के साथ पार्टनरशिप और इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं?
इसके जवाब में उन्होंने बताया कि हमारे पास अलग-अलग फील्ड और देश में इंडस्ट्री के साथ पार्टनरशिप है। इसकी खासियत यह है कि छात्र ग्रेजुएट होने से पहले ही देख लेते हैं कि असल काम कैसा होता है, वह वहां की संस्कृति और अपेक्षाओं को अच्छी तरह समझ लेते हैं। जब आपको कोई यह बताने वाला ना हो कि क्या करना है तब आप कैसे काम करते हैं यही सही मायने में सहनशीलता है।
उन्होंने बताया विदेशी छात्रों के लिए यह एक्सपीरियंस और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है क्योंकि वह काम तो सीख ही रहे हैं लेकिन साथ ही साथ एक अलग वर्क प्लेस को भी अपना रहे। मैं यह भी कहूंगी कि दुनिया अब बदल चुकी है । करियर का मतलब सिर्फ लंदन और यूरोप में जॉब करना नहीं है। जॉब आपका अवसर दुबई सिंगापुर या खुद उनके देश भारत में भी हो सकते हैं। हमारा लक्ष्य छात्रों को कहीं भी काम करने के लिए तैयार करना है। ताकि वे एक ऐसे व्यक्ति बनाकर उभरे जिसे कोई भी कंपनी अपने साथ काम करने के लिए रखना चाहती हो।

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