गुरुवार, 21 मई 2026

AI से डरें या बनें करोड़ों के खिलाड़ी? अमर उजाला संवाद में खुला भविष्य का सबसे बड़ा राज!

 

ए आई के कारनामे इतनी हैरान करने वाले हो गए हैं कि आज घर-घर और चारों तरफ ए आई की चर्चा हो रही है। आजकल हर इंसान खुलकर हर काम में आई का सपोर्ट ले रहा है। बल्कि घर से लेकर ऑफिस तक ए आई हमारे काम करने के तरीकों को बदल रहा है। आज ए आई बहुत सारे काम इंसानों से तेज गति और बेहतर तरीके से कर सकता है। इतना ही नहीं ए आई हमारे सोचने समझने और प्रतिक्रिया करने के तरीकों को भी बदल रहा है। ऐसे में ए आई का असर केवल नौकरियां तक ही सीमित नहीं रह गया है। बल्कि यह हमें भावात्मक रूप से भी बदल रहा है। ए आई के साथ इंसानों के कैसी भविष्य की कल्पना की जा सकती है इस पर अमर उजाला संवाद 2026 में विस्तार से चर्चा हुई है।

 लखनऊ में आयोजित अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026 के दूसरे दिन भविष्य की दुनिया, ए आई,और इंसान विषय पर चर्चा करने के लिए कवि और फिल्म गीतकार आलोक श्रीवास्तव एस 45 ए आई के फाउंडर अमन सिंह और ईइंटेलिमो आई के फाउंडर सौरव गुप्ता शामिल हुए। इस चर्चा का मुख्य केंद्र ए आई टूल्स  का सही उपयोग, नौकरियों के अफसर और ए आई के दौर में इंसानी रचनात्मक को खतरा जैसे विषय रहे।

 आलोक श्रीवास्तव के तथ्य 

 कवि और फिल्म गीतकार आलोक श्रीवास्तव ने कहा है ए आई भावनाओं को नहीं समझ सकता ए आई ने प्यार नहीं किया, जीवन में संघर्ष नहीं किया, उनका कहना है किए ए आई डेटा देता है, लेकिन जिंदगी केवल लेखक दे सकता है। कवि आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि ए आई भावनाओं से भरी कविताएं नहीं लिख सकता। ए आई द्वारा लिखी गई कविताएं मशीनी दिखती हैं। ए आई को लेकर निर्भरता पर आलोक श्रीवास्तव ने कहा है समस्या तब है जब लोग ए आई से लिखे गए कंटेंट को जस का तस उपयोग में लाते हैं। जो रचनात्मकता के नज़रये से सही नहीं है। ऐसे में अगर ध्यान ना दे तो ए आई द्वारा की गई गलतियां हमारी रचनाओं में भी दिखने लगेगी।

 ए आई से डरे नहीं इसे अपनाएं अमन सिँह 

 s45 ए आई के फाउंडर अमन सिंह ने बताया कि ए आई से डरने के बजाय हमें उसे अडॉप्ट करना चाहिए। उन्होंने बताया कि जो लोग ए आई को अपना रहे हैं, वह अपने करियर में ज्यादा तरक्की कर रहे हैं। ए आई से अवसरो के बारे में बताते हुए अमन सिंह ने कहा ए आई अपने जवाब में कई गलतियां भी करता है। इसे समझने और ठीक करने वालों के लिए भी कई अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा है कि हमें ए आई के साथ आगे बढ़ाने के लिए क्रिएटिविटी और आइडिया ज्यादा चाहिए  ना कि टूल्स जिनकी इस क्षेत्र में पहले से ही भरमार है।

 ए आई विकसित भारत का सपना होगा पूरा सौरव गुप्ता 

 इंटेलिमो ए आई के फाउंडर सौरव गुप्ता ने ए आई पर कहा है की ए आई से नौकरी जाने का सवाल ही क्यों उठता है। बल्कि हमें यह सवाल करना चाहिए कि ए आई को हम अपने काम में उसे कैसे करेंगे। उन्होंने उदाहरण दिया कि जब एटीएम मशीन आई थी  तो बैंक कर्मचारी इसी तरह डर रहे थे। लेकिन अगर आज के समय में देखा जाए तो तकनीक ने हमारा काम आसान कर दिया। अब हमें पैसे निकालने के लिए बैंकों की लंबी लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ता। उन्होंने कहा है कि युवाओं को ए आई को एक डर नहीं बल्कि एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। सौरव ने बताया कि ए आई की मदद से आज एक औसत कोडर मेटा और गूगल में काम करने वाले कोडर के जितना कमाई कर रहा है। 

 सौरव सिंह ने ए आई टूल के दुरुपयोग के बारे में बताया कि लोग ए आई से घटिया कंटेंट भी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हम अपने प्लेटफार्म पर गलत प्रॉम्पट को चलने से रोक देते हैं। युवाओं को ए आई एक अफसर के रूप में मिला है जिसका सही इस्तेमाल करने से ही सफलता मिल सकती है। ए आई का सबसे बेहतर उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में किया जा सकता है। 



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